बहिन! कंससे सताये जाकर हमलोग इधर-उधर अनेक दिशाओंमें भगे हुए थे। अभी कुछ ही दिन हुए, ईश्वरकृपासे हम सब पुनः अपना स्थान प्राप्त कर सके हैं॥ २२॥
कंसप्रतापिताः सर्वे वयं याता दिशं दिशम्।
एतर्ह्येव पुनः स्थानं दैवेनासादिताः स्वसः॥ २२
बहिन! कंससे सताये जाकर हमलोग इधर-उधर अनेक दिशाओंमें भगे हुए थे। अभी कुछ ही दिन हुए, ईश्वरकृपासे हम सब पुनः अपना स्थान प्राप्त कर सके हैं॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.82.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 632) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/82/22/