श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.82.21

दशम स्कन्ध · अध्याय 82 · अथ द‍्व्यशीतितमोऽध्यायः

वसुदेव उवाच

अम्ब मास्मानसूयेथा दैवक्रीडनकान् नरान्।

ईशस्य हि वशे लोकः कुरुते कार्यतेऽथवा॥ २१

amba māsmānasūyethā daivakrīḍanakān narān|

īśasya hi vaśe lokaḥ kurute kāryate'thavā|| 21

अर्थ

वसुदेवजीने कहा—बहिन! उलाहना मत दो। हमसे बिलग न मानो। सभी मनुष्य दैवके खिलौने हैं। यह सम्पूर्ण लोक ईश्‍वरके वशमें रहकर कर्म करता है और उसका फल भोगता है॥ २१॥

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