सोनेके सिंहासन शोभायमान हो रहे थे, जिनपर बड़ी कोमल-कोमल गद्दियाँ लगी हुई थीं! ऐसे चँदोवे भी झिलमिला रहे थे जिनमें मोतियोंकी लड़ियाँ लटक रही थीं॥ ३०॥
आसनानि च हैमानि मृदूपस्तरणानि च।
मुक्तादामविलम्बीनि वितानानि द्युमन्ति च॥ ३०
सोनेके सिंहासन शोभायमान हो रहे थे, जिनपर बड़ी कोमल-कोमल गद्दियाँ लगी हुई थीं! ऐसे चँदोवे भी झिलमिला रहे थे जिनमें मोतियोंकी लड़ियाँ लटक रही थीं॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.81.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 628) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/81/30/