परीक्षित्! परमानन्दस्वरूप भगवान् अपने प्यारे सखा ब्राह्मणदेवताके अंग-स्पर्शसे अत्यन्त आनन्दित हुए। उनके कमलके समान कोमल नेत्रोंसे प्रेमके आँसू बरसने लगे॥ १९॥
सख्युः प्रियस्य विप्रर्षेरंगसंगातिनिर्वृतः।
प्रीतो व्यमुंचदब्बिन्दून् नेत्राभ्यां पुष्करेक्षणः॥ १९
परीक्षित्! परमानन्दस्वरूप भगवान् अपने प्यारे सखा ब्राह्मणदेवताके अंग-स्पर्शसे अत्यन्त आनन्दित हुए। उनके कमलके समान कोमल नेत्रोंसे प्रेमके आँसू बरसने लगे॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.80.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 621) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/80/19/