॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.80.12
स एवं भार्यया विप्रो बहुशः प्रार्थितो मृदु।
अयं हि परमो लाभ उत्तमश्लोकदर्शनम्॥ १२
sa evaṃ bhāryayā vipro bahuśaḥ prārthito mṛdu|
ayaṃ hi paramo lābha uttamaślokadarśanam|| 12
अर्थ
इस प्रकार जब उन ब्राह्मणदेवताकी पत्नीने अपने पतिदेवसे कई बार बड़ी नम्रतासे प्रार्थना की, तब उन्होंने सोचा कि ‘धनकी तो कोई बात नहीं है; परन्तु भगवान् श्रीकृष्णका दर्शन हो जायगा, यह तो जीवनका बहुत बड़ा लाभ है’॥ १२॥