श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.8.51

दशम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

ततो भक्तिर्भगवति पुत्रीभूते जनार्दने।

दम्पत्योर्नितरामासीद् गोपगोपीषु भारत॥ ५१

tato bhaktirbhagavati putrībhūte janārdane|

dampatyornitarāmāsīd gopagopīṣu bhārata|| 51

अर्थ

परीक्षित्! अब इस जन्ममें जन्म-मृत्युके चक्रसे छुड़ानेवाले भगवान् उनके पुत्र हुए और समस्त गोप-गोपियोंकी अपेक्षा इन पति-पत्‍नी नन्द और यशोदाजीका उनके प्रति अत्यन्त प्रेम हुआ॥ ५१॥

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