ब्रह्माजीने कहा—‘ऐसा ही होगा ।’ वे ही परमयशस्वी भगवन्मय द्रोण व्रजमें पैदा हुए और उनका नाम हुआ नन्द। और वे ही धरा इस जन्ममें यशोदाके नामसे उनकी पत्नी हुईं॥ ५०॥
अस्त्वित्युक्तः स भगवान् व्रजे द्रोणो महायशाः।
जज्ञे नन्द इति ख्यातो यशोदा सा धराभवत्॥ ५०
ब्रह्माजीने कहा—‘ऐसा ही होगा ।’ वे ही परमयशस्वी भगवन्मय द्रोण व्रजमें पैदा हुए और उनका नाम हुआ नन्द। और वे ही धरा इस जन्ममें यशोदाके नामसे उनकी पत्नी हुईं॥ ५०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.8.50 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 181) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/8/50/