श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.8.49

दशम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

जातयोर्नौ महादेवे भुवि विश्‍वेश्‍वरे हरौ।

भक्तिः स्यात् परमा लोके ययाञ्जो दुर्गतिं तरेत्॥ ४९

jātayornau mahādeve bhuvi viśveśvare harau|

bhaktiḥ syāt paramā loke yayāñjo durgatiṃ taret|| 49

अर्थ

‘भगवन्! जब हम पृथ्वीपर जन्म लें, तब जगदीश्‍वर भगवान् श्रीकृष्णमें हमारी अनन्य प्रेममयी भक्ति हो—जिस भक्तिके द्वारा संसारमें लोग अनायास ही दुर्गतियोंको पार कर जाते हैं’॥ ४९॥

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