॥ श्रीहरिः ॥
कृष्णो ब्रह्मण आदेशं सत्यं कर्तुं व्रजे विभुः।
सहरामो वसंश्चक्रे तेषां प्रीतिं स्वलीलया॥ ५२
kṛṣṇo brahmaṇa ādeśaṃ satyaṃ kartuṃ vraje vibhuḥ|
saharāmo vasaṃścakre teṣāṃ prītiṃ svalīlayā|| 52
अर्थ
ब्रह्माजीकी बात सत्य करनेके लिये भगवान् श्रीकृष्ण बलरामजीके साथ व्रजमें रहकर समस्त व्रजवासियोंको अपनी बाल-लीलासे आनन्दित करने लगे॥ ५२॥
इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां दशमस्कन्धे पूर्वार्धे
विश्वरूपदर्शनेऽष्टमोऽध्यायः॥ ८॥
कृष्णो ब्रह्मण आदेशं सत्यं कर्तुं व्रजे विभुः।
सहरामो वसंश्चक्रे तेषां प्रीतिं स्वलीलया॥ ५२
ब्रह्माजीकी बात सत्य करनेके लिये भगवान् श्रीकृष्ण बलरामजीके साथ व्रजमें रहकर समस्त व्रजवासियोंको अपनी बाल-लीलासे आनन्दित करने लगे॥ ५२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.8.52 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 181) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/8/52/