श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.8.27

दशम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

ततस्तु भगवान् कृष्णो वयस्यैर्व्रजबालकैः।

सहरामो व्रजस्त्रीणां चिक्रीडे जनयन् मुदम्॥ २७

tatastu bhagavān kṛṣṇo vayasyairvrajabālakaiḥ|

saharāmo vrajastrīṇāṃ cikrīḍe janayan mudam|| 27

अर्थ

ये व्रजवासियोंके कन्हैया स्वयं भगवान् हैं, परम सुन्दर और परम मधुर! अब वे और बलराम अपनी ही उम्रके ग्वालबालोंको अपने साथ लेकर खेलनेके लिये व्रजमें निकल पड़ते और व्रजकी भाग्यवती गोपियोंको निहाल करते हुए तरह-तरहके खेल खेलते॥ २७॥✎ 1656

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1656 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: नन्द-बाबाके → नन्दबाबाके

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