तदनन्तर नैमिषारण्यवासी ऋषियोंसे विदा होकर उनके आज्ञानुसार बलरामजी ब्राह्मणोंके साथ कौशिकी नदीके तटपर आये। वहाँ स्नान करके वे उस सरोवरपर गये, जहाँसे सरयू नदी निकली है॥ ९॥
अथ तैरभ्यनुज्ञातः कौशिकीमेत्य ब्राह्मणैः।
स्नात्वा सरोवरमगाद् यतः सरयुरास्रवत्॥ ९
तदनन्तर नैमिषारण्यवासी ऋषियोंसे विदा होकर उनके आज्ञानुसार बलरामजी ब्राह्मणोंके साथ कौशिकी नदीके तटपर आये। वहाँ स्नान करके वे उस सरोवरपर गये, जहाँसे सरयू नदी निकली है॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.79.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 616) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/79/9/