इसके बाद ऋषियोंने बलरामजीको दिव्य वस्त्र और दिव्य आभूषण दिये तथा एक ऐसी वैजयन्ती माला भी दी, जो सौन्दर्यका आश्रय एवं कभी न मुरझानेवाले कमलके पुष्पोंसे युक्त थी॥ ८॥
वैजयन्तीं ददुर्मालां श्रीधामाम्लानपंकजाम्।
रामाय वाससी दिव्ये दिव्यान्याभरणानि च॥ ८
इसके बाद ऋषियोंने बलरामजीको दिव्य वस्त्र और दिव्य आभूषण दिये तथा एक ऐसी वैजयन्ती माला भी दी, जो सौन्दर्यका आश्रय एवं कभी न मुरझानेवाले कमलके पुष्पोंसे युक्त थी॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.79.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 616) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/79/8/