श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.79.18

दशम स्कन्ध · अध्याय 79 · अथैकोनाशीतितमोऽध्यायः

ततः फाल्गुनमासाद्य पंचाप्सरसमुत्तमम्।

विष्णुः सन्‍निहितो यत्र स्नात्वास्पर्शद् गवायुतम्॥ १८

tataḥ phālgunamāsādya paṃcāpsarasamuttamam|

viṣṇuḥ sannihito yatra snātvāsparśad gavāyutam|| 18

अर्थ

इसके बाद वे फाल्गुन तीर्थ—अनन्तशयन क्षेत्रमें गये और वहाँके सर्वश्रेष्ठ पंचाप्सरस तीर्थमें स्नान किया। उस तीर्थमें सर्वदा विष्णुभगवान्‌का सान्‍निध्य रहता है। वहाँ बलरामजीने दस हजार गौएँ दान कीं॥ १८॥

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