वहाँ बलरामजीने ब्राह्मणोंको दस हजार गौएँ दान कीं। फिर वहाँसे कृतमाला और ताम्रपर्णी नदियोंमें स्नान करते हुए वे मलयपर्वतपर गये। वह पर्वत सात कुलपर्वतोंमेंसे एक है॥ १६॥
तत्रायुतमदाद् धेनूर्ब्राह्मणेभ्यो हलायुधः।
कृतमालां ताम्रपर्णीं मलयं च कुलाचलम्॥ १६
वहाँ बलरामजीने ब्राह्मणोंको दस हजार गौएँ दान कीं। फिर वहाँसे कृतमाला और ताम्रपर्णी नदियोंमें स्नान करते हुए वे मलयपर्वतपर गये। वह पर्वत सात कुलपर्वतोंमेंसे एक है॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.79.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 617) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/79/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1191 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): धेनूर्ब्ह्मणेभ्यो → धेनूर्ब्राह्मणेभ्यो