श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.78.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 78 · अथाष्टसप्ततितमोऽध्यायः

गदानिर्भिन्‍नहृदय उद्वमन् रुधिरं मुखात्।

प्रसार्य केशबाह्वङ्‌घ्रीन् धरण्यां न्यपतद् व्यसुः॥ ९

gadānirbhinnahṛdaya udvaman rudhiraṃ mukhāt|

prasārya keśabāhvaṅghrīn dharaṇyāṃ nyapatad vyasuḥ|| 9

अर्थ

गदाकी चोटसे दन्तवक्त्रका कलेजा फट गया। वह मुँहसे खून उगलने लगा। उसके बाल बिखर गये, भुजाएँ और पैर फैल गये। निदान निष्प्राण होकर वह धरतीपर गिर पड़ा॥ ९॥

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