रणभूमिमें गदाकी चोट खाकर भी भगवान् श्रीकृष्ण टस-से-मस न हुए। उन्होंने अपनी बहुत बड़ी कौमोदकी गदा सँभालकर उससे दन्तवक्त्रके वक्षःस्थलपर प्रहार किया॥ ८॥
गदयाभिहतोऽप्याजौ न चचाल यदूद्वहः।
कृष्णोऽपि तमहन् गुर्व्या कौमोदक्या स्तनान्तरे॥ ८
रणभूमिमें गदाकी चोट खाकर भी भगवान् श्रीकृष्ण टस-से-मस न हुए। उन्होंने अपनी बहुत बड़ी कौमोदकी गदा सँभालकर उससे दन्तवक्त्रके वक्षःस्थलपर प्रहार किया॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.78.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 611) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/78/8/