श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.78.27

दशम स्कन्ध · अध्याय 78 · अथाष्टसप्ततितमोऽध्यायः

एतदर्थो हि लोकेऽस्मिन्‍नवतारो मया कृतः।

वध्या मे धर्मध्वजिनस्ते हि पातकिनोऽधिकाः॥ २७

etadartho hi loke'sminnavatāro mayā kṛtaḥ|

vadhyā me dharmadhvajinaste hi pātakino'dhikāḥ|| 27

अर्थ

जो लोग धर्मका चिह्न धारण करते हैं, परन्तु धर्मका पालन नहीं करते, वे अधिक पापी हैं और वे मेरे लिये वध करने योग्य हैं। इस जगत‍्में इसीलिये मैंने अवतार धारण किया है’॥ २७॥

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