श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.77.20

दशम स्कन्ध · अध्याय 77 · अथ सप्तसप्ततितमोऽध्यायः

इत्युक्त्वा भगवाञ्छाल्वं गदया भीमवेगया।

तताड जत्रौ संरब्धः स चकम्पे वमन्‍नसृक्॥ २०

ityuktvā bhagavāñchālvaṃ gadayā bhīmavegayā|

tatāḍa jatrau saṃrabdhaḥ sa cakampe vamannasṛk|| 20

अर्थ

इस प्रकार कहकर भगवान् श्रीकृष्णने क्रोधित हो अपनी अत्यन्त वेगवती और भयंकर गदासे शाल्वके जत्रुस्थान (हँसली) पर प्रहार किया। इससे वह खून उगलता हुआ काँपने लगा॥ २०॥

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