श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.77.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 77 · अथ सप्तसप्ततितमोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

वृथा त्वं कत्थसे मन्द न पश्यस्यन्तिकेऽन्तकम्।

पौरुषं दर्शयन्ति स्म शूरा न बहुभाषिणः॥ १९

vṛthā tvaṃ katthase manda na paśyasyantike'ntakam|

pauruṣaṃ darśayanti sma śūrā na bahubhāṣiṇaḥ|| 19

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने कहा—‘रे मन्द! तू वृथा ही बहक रहा है। तुझे पता नहीं कि तेरे सिरपर मौत सवार है। शूरवीर व्यर्थकी बकवाद नहीं करते, वे अपनी वीरता ही दिखलाया करते हैं’॥ १९॥

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