श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.76.14

दशम स्कन्ध · अध्याय 76 · अथ षट्सप्ततितमोऽध्यायः

सात्यकिश्‍चारुदेष्णश्‍च साम्बोऽक्रूरः सहानुजः।

हार्दिक्यो भानुविन्दश्‍च गदश्‍च शुकसारणौ॥ १४

sātyakiścārudeṣṇaśca sāmbo'krūraḥ sahānujaḥ|

hārdikyo bhānuvindaśca gadaśca śukasāraṇau|| 14

अर्थ

उनके पीछे-पीछे सात्यकि, चारुदेष्ण, साम्ब, भाइयोंके साथ अक्रूर, कृतवर्मा, भानुविन्द, गद, शुक, सारण आदि बहुत-से वीर बड़े-बड़े धनुष धारण करके निकले। ये सब-के-सब महारथी थे। सबने कवच पहन रखे थे और सबकी रक्षाके लिये बहुत-से रथ, हाथी, घोड़े तथा पैदल सेना साथ-साथ चल रही थी॥ १४-१५॥

यह अर्थ श्लोक 14–15 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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