ऋत्विजोंने पत्नी-संयाज (एक प्रकारका यज्ञकर्म) तथा यज्ञान्त-स्नानसम्बन्धी कर्म करवाकर द्रौपदीके साथ सम्राट् युधिष्ठिरको आचमन करवाया और इसके बाद गंगास्नान॥ १९॥
पत्नीसंयाजावभृथ्यैश्चरित्वा ते तमृत्विजः।
आचान्तं स्नापयांचक्रुर्गंगायां सह कृष्णया॥ १९
ऋत्विजोंने पत्नी-संयाज (एक प्रकारका यज्ञकर्म) तथा यज्ञान्त-स्नानसम्बन्धी कर्म करवाकर द्रौपदीके साथ सम्राट् युधिष्ठिरको आचमन करवाया और इसके बाद गंगास्नान॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.75.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 599) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/75/19/