श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.74.6

दशम स्कन्ध · अध्याय 74 · अथ चतुःसप्ततितमोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

इत्युक्त्वा यज्ञिये काले वव्रे युक्तान् स ऋत्विजः।

कृष्णानुमोदितः पार्थो ब्राह्मणान् ब्रह्मवादिनः॥ ६

ityuktvā yajñiye kāle vavre yuktān sa ṛtvijaḥ|

kṛṣṇānumoditaḥ pārtho brāhmaṇān brahmavādinaḥ|| 6

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! इस प्रकार कहकर धर्मराज युधिष्ठिरने भगवान् श्रीकृष्णकी अनुमतिसे यज्ञके योग्य समय आनेपर यज्ञके कर्मोंमें निपुण वेदवादी ब्राह्मणोंको ऋत्विज्, आचार्य आदिके रूपमें वरण किया॥ ६॥

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