श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! धर्मराज युधिष्ठिर जरासन्धका वध और सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्णकी अद्भुत महिमा सुनकर बहुत प्रसन्न हुए और उनसे बोले॥ १॥
एवं युधिष्ठिरो राजा जरासन्धवधं विभोः।
कृष्णस्य चानुभावं तं श्रुत्वा प्रीतस्तमब्रवीत्॥ १
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! धर्मराज युधिष्ठिर जरासन्धका वध और सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्णकी अद्भुत महिमा सुनकर बहुत प्रसन्न हुए और उनसे बोले॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.74.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 591) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/74/1/