श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.74.1

दशम स्कन्ध · अध्याय 74 · अथ चतुःसप्ततितमोऽध्यायः

अथ चतुःसप्ततितमोऽध्यायः

भगवान्‌की अग्रपूजा और शिशुपालका उद्धार

श्रीशुक उवाच

एवं युधिष्ठिरो राजा जरासन्धवधं विभोः।

कृष्णस्य चानुभावं तं श्रुत्वा प्रीतस्तमब्रवीत्॥ १

evaṃ yudhiṣṭhiro rājā jarāsandhavadhaṃ vibhoḥ|

kṛṣṇasya cānubhāvaṃ taṃ śrutvā prītastamabravīt|| 1

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! धर्मराज युधिष्ठिर जरासन्धका वध और सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्णकी अद्भुत महिमा सुनकर बहुत प्रसन्‍न हुए और उनसे बोले॥ १॥

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