मधुसूदन! हमारे स्वामी! हम मगधराज जरासन्धका कोई दोष नहीं देखते। भगवन्! यह तो आपका बहुत बड़ा अनुग्रह है कि हम राजा कहलानेवाले लोग राज्यलक्ष्मीसे च्युत कर दिये गये॥ ९॥✎ 1709
नैनं नाथान्वसूयामो मागधं मधुसूदन।
अनुग्रहो यद् भवतो राज्ञां राज्यच्युतिर्विभो॥ ९
मधुसूदन! हमारे स्वामी! हम मगधराज जरासन्धका कोई दोष नहीं देखते। भगवन्! यह तो आपका बहुत बड़ा अनुग्रह है कि हम राजा कहलानेवाले लोग राज्यलक्ष्मीसे च्युत कर दिये गये॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.73.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 587) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/73/9/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)