श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.73.34

दशम स्कन्ध · अध्याय 73 · अथ त्रिसप्ततितमोऽध्यायः

अभिवन्द्याथ राजानं भीमार्जुनजनार्दनाः।

सर्वमाश्रावयांचक्रुरात्मना यदनुष्ठितम्॥ ३४

abhivandyātha rājānaṃ bhīmārjunajanārdanāḥ|

sarvamāśrāvayāṃcakrurātmanā yadanuṣṭhitam|| 34

अर्थ

भीमसेन, अर्जुन और भगवान् श्रीकृष्णने राजा युधिष्ठिरकी वन्दना की और वह सब कृत्य कह सुनाया, जो उन्हें जरासन्धके वधके लिये करना पड़ा था॥ ३४॥✎ 1711

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1711 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: इन्द्र-प्रस्थके → इन्द्रप्रस्थके

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