gatvā te khāṇḍavaprasthaṃ śaṃkhān dadhmurjitārayaḥ|
harṣayantaḥ svasuhṛdo durhṛdāṃ cāsukhāvahāḥ|| 32
अर्थ
परीक्षित्! इस प्रकार भगवान् श्रीकृष्ण भीमसेनके द्वारा जरासन्धका वध करवाकर भीमसेन और अर्जुनके साथ जरासन्धनन्दन सहदेवसे सम्मानित होकर इन्द्रप्रस्थके लिये चले। उन विजयी वीरोंने इन्द्रप्रस्थके पास पहुँचकर अपने-अपने शंख बजाये, जिससे उनके इष्टमित्रोंको सुख और शत्रुओंको बड़ा दुःख हुआ॥ ३१-३२॥✎ 1711
यह अर्थ श्लोक 31–32 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।
गत्वा ते खाण्डवप्रस्थं शंखान् दध्मुर्जितारयः।
हर्षयन्तः स्वसुहृदो दुर्हृदां चासुखावहाः॥ ३२
परीक्षित्! इस प्रकार भगवान् श्रीकृष्ण भीमसेनके द्वारा जरासन्धका वध करवाकर भीमसेन और अर्जुनके साथ जरासन्धनन्दन सहदेवसे सम्मानित होकर इन्द्रप्रस्थके लिये चले। उन विजयी वीरोंने इन्द्रप्रस्थके पास पहुँचकर अपने-अपने शंख बजाये, जिससे उनके इष्टमित्रोंको सुख और शत्रुओंको बड़ा दुःख हुआ॥ ३१-३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.73.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 590) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/73/32/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)