फिर भगवान् श्रीकृष्णने उन्हें सुवर्ण और मणियोंसे भूषित एवं श्रेष्ठ घोड़ोंसे युक्त रथोंपर चढ़ाया, मधुर वाणीसे तृप्त किया और फिर उन्हें उनके देशोंको भेज दिया॥ २८॥
रथान् सदश्वानारोप्य मणिकांचनभूषितान्।
प्रीणय्य सूनृतैर्वाक्यैः स्वदेशान् प्रत्ययापयत्॥ २८
फिर भगवान् श्रीकृष्णने उन्हें सुवर्ण और मणियोंसे भूषित एवं श्रेष्ठ घोड़ोंसे युक्त रथोंपर चढ़ाया, मधुर वाणीसे तृप्त किया और फिर उन्हें उनके देशोंको भेज दिया॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.73.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 590) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/73/28/