श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.73.25

दशम स्कन्ध · अध्याय 73 · अथ त्रिसप्ततितमोऽध्यायः

सपर्यां कारयामास सहदेवेन भारत।

नरदेवोचितैर्वस्त्रैर्भूषणैः स्रग्विलेपनैः॥ २५

saparyāṃ kārayāmāsa sahadevena bhārata|

naradevocitairvastrairbhūṣaṇaiḥ sragvilepanaiḥ|| 25

अर्थ

परीक्षित्! जरासन्धके पुत्र सहदेवसे उनको राजोचित वस्त्र-आभूषण, माला-चन्दन आदि दिलवाकर उनका खूब सम्मान करवाया॥ २५॥

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