॥ श्रीहरिः ॥
सपर्यां कारयामास सहदेवेन भारत।
नरदेवोचितैर्वस्त्रैर्भूषणैः स्रग्विलेपनैः॥ २५
saparyāṃ kārayāmāsa sahadevena bhārata|
naradevocitairvastrairbhūṣaṇaiḥ sragvilepanaiḥ|| 25
अर्थ
परीक्षित्! जरासन्धके पुत्र सहदेवसे उनको राजोचित वस्त्र-आभूषण, माला-चन्दन आदि दिलवाकर उनका खूब सम्मान करवाया॥ २५॥
सपर्यां कारयामास सहदेवेन भारत।
नरदेवोचितैर्वस्त्रैर्भूषणैः स्रग्विलेपनैः॥ २५
परीक्षित्! जरासन्धके पुत्र सहदेवसे उनको राजोचित वस्त्र-आभूषण, माला-चन्दन आदि दिलवाकर उनका खूब सम्मान करवाया॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.73.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 590) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/73/25/