॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.73.13
त एव कृष्णाद्य गभीररंहसा
दुरन्तवीर्येण विचालिताः श्रियः।
कालेन तन्वा भवतोऽनुकम्पया
विनष्टदर्पाश्चरणौ स्मराम ते॥ १३
ta eva kṛṣṇādya gabhīraraṃhasā
durantavīryeṇa vicālitāḥ śriyaḥ|
kālena tanvā bhavato'nukampayā
vinaṣṭadarpāścaraṇau smarāma te|| 13
अर्थ
सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीकृष्ण! कालकी गति बड़ी गहन है। वह इतना बलवान् है कि किसीके टाले टलता नहीं। क्यों न हो, वह आपका शरीर ही तो है। अब उसने हमलोगोंको श्रीहीन, निर्धन कर दिया है। आपकी अहैतुक अनुकम्पासे हमारा घमंड चूर-चूर हो गया। अब हम आपके चरणकमलोंका स्मरण करते हैं॥ १३॥✎ 1709