श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.72.48

दशम स्कन्ध · अध्याय 72 · अथ द्विसप्ततितमोऽध्यायः

सहदेवं तत्तनयं भगवान् भूतभावनः।

अभ्यषिंचदमेयात्मा मगधानां पतिं प्रभुः।

मोचयामास राजन्यान् संरुद्धा मागधेन ये॥ ४८

sahadevaṃ tattanayaṃ bhagavān bhūtabhāvanaḥ|

abhyaṣiṃcadameyātmā magadhānāṃ patiṃ prabhuḥ|

mocayāmāsa rājanyān saṃruddhā māgadhena ye|| 48

अर्थ

सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्णके स्वरूप और विचारोंको कोई समझ नहीं सकता। वास्तवमें वे ही समस्त प्राणियोंके जीवनदाता हैं। उन्होंने जरासन्धके राजसिंहासनपर उसके पुत्र सहदेवका अभिषेक कर दिया और जरासन्धने जिन राजाओंको कैदी बना रखा था, उन्हें कारागारसे मुक्त कर दिया॥ ४८॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां दशमस्कन्धे उत्तरार्धे
जरासन्धवधो नाम द्विसप्ततितमोऽध्यायः॥ ७२॥

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