सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्णके स्वरूप और विचारोंको कोई समझ नहीं सकता। वास्तवमें वे ही समस्त प्राणियोंके जीवनदाता हैं। उन्होंने जरासन्धके राजसिंहासनपर उसके पुत्र सहदेवका अभिषेक कर दिया और जरासन्धने जिन राजाओंको कैदी बना रखा था, उन्हें कारागारसे मुक्त कर दिया॥ ४८॥
सहदेवं तत्तनयं भगवान् भूतभावनः।
अभ्यषिंचदमेयात्मा मगधानां पतिं प्रभुः।
मोचयामास राजन्यान् संरुद्धा मागधेन ये॥ ४८
सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्णके स्वरूप और विचारोंको कोई समझ नहीं सकता। वास्तवमें वे ही समस्त प्राणियोंके जीवनदाता हैं। उन्होंने जरासन्धके राजसिंहासनपर उसके पुत्र सहदेवका अभिषेक कर दिया और जरासन्धने जिन राजाओंको कैदी बना रखा था, उन्हें कारागारसे मुक्त कर दिया॥ ४८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.72.48 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 586) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/72/48/