॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.72.46
एकपादोरुवृषणकटिपृष्ठस्तनांसके ।
एकबाह्वक्षिभ्रूकर्णे शकले ददृशुः प्रजाः॥ ४६
ekapādoruvṛṣaṇakaṭipṛṣṭhastanāṃsake |
ekabāhvakṣibhrūkarṇe śakale dadṛśuḥ prajāḥ|| 46
अर्थ
लोगोंने देखा कि जरासन्धके शरीरके दो टुकड़े हो गये हैं, और इस प्रकार उनके एक-एक पैर, जाँघ, अण्डकोश, कमर, पीठ, स्तन, कंधा, भुजा, नेत्र, भौंह और कान अलग-अलग हो गये हैं॥ ४६॥