श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.72.43

दशम स्कन्ध · अध्याय 72 · अथ द्विसप्ततितमोऽध्यायः

संचिन्त्यारिवधोपायं भीमस्यामोघदर्शनः।

दर्शयामास विटपं पाटयन्‍निव संज्ञया॥ ४३

saṃcintyārivadhopāyaṃ bhīmasyāmoghadarśanaḥ|

darśayāmāsa viṭapaṃ pāṭayanniva saṃjñayā|| 43

अर्थ

परीक्षित्! भगवान्‌का ज्ञान अबाध है। अब उन्होंने उसकी मृत्युका उपाय जानकर एक वृक्षकी डालीको बीचोबीचसे चीर दिया और इशारेसे भीमसेनको दिखाया॥ ४३॥

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