श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.72.36

दशम स्कन्ध · अध्याय 72 · अथ द्विसप्ततितमोऽध्यायः

ततश्‍चटचटाशब्दो वज्रनिष्पेषसन्‍निभः।

गदयोः क्षिप्तयो राजन् दन्तयोरिव दन्तिनोः॥ ३६

tataścaṭacaṭāśabdo vajraniṣpeṣasannibhaḥ|

gadayoḥ kṣiptayo rājan dantayoriva dantinoḥ|| 36

अर्थ

परीक्षित्! जब एककी गदा दूसरेकी गदासे टकराती, तब ऐसा मालूम होता मानो युद्ध करनेवाले दो हाथियोंके दाँत आपसमें भिड़कर चटचटा रहे हों या बड़े जोरसे बिजली तड़क रही हो॥ ३६॥

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