श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.72.35

दशम स्कन्ध · अध्याय 72 · अथ द्विसप्ततितमोऽध्यायः

मण्डलानि विचित्राणि सव्यं दक्षिणमेव च।

चरतोः शुशुभे युद्धं नटयोरिव रंगिणोः॥ ३५

maṇḍalāni vicitrāṇi savyaṃ dakṣiṇameva ca|

caratoḥ śuśubhe yuddhaṃ naṭayoriva raṃgiṇoḥ|| 35

अर्थ

वे दायें-बायें तरह-तरहके पैंतरे बदलते हुए ऐसे शोभायमान हो रहे थे—मानो दो श्रेष्ठ नट रंगमंचपर युद्धका अभिनय कर रहे हों॥ ३५॥

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