श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.72.17

दशम स्कन्ध · अध्याय 72 · अथ द्विसप्ततितमोऽध्यायः

ते गत्वाऽऽतिथ्यवेलायां गृहेषु गृहमेधिनम्।

ब्रह्मण्यं समयाचेरन् राजन्या ब्रह्मलिंगिनः॥ १७

te gatvā''tithyavelāyāṃ gṛheṣu gṛhamedhinam|

brahmaṇyaṃ samayāceran rājanyā brahmaliṃginaḥ|| 17

अर्थ

राजा जरासन्ध ब्राह्मणोंका भक्त और गृहस्थोचित धर्मोंका पालन करनेवाला था। उपर्युक्त तीनों क्षत्रिय ब्राह्मणका वेष धारण करके अतिथि-अभ्यागतोंके सत्कारके समय जरासन्धके पास गये और उससे इस प्रकार याचना की—॥ १७॥

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