श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.72.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 72 · अथ द्विसप्ततितमोऽध्यायः

न कश्‍चिन्मत्परं लोके तेजसा यशसा श्रिया।

विभूतिभिर्वाभिभवेद् देवोऽपि किमु पार्थिवः॥ ११

na kaścinmatparaṃ loke tejasā yaśasā śriyā|

vibhūtibhirvābhibhaved devo'pi kimu pārthivaḥ|| 11

अर्थ

संसारमें कोई बड़े-से-बड़ा देवता भी तेज, यश, लक्ष्मी, सौन्दर्य और ऐश्‍वर्य आदिके द्वारा मेरे भक्तका तिरस्कार नहीं कर सकता। फिर कोई राजा उसका तिरस्कार कर दे, इसकी तो सम्भावना ही क्या है?॥ ११॥

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