श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.71.8

दशम स्कन्ध · अध्याय 71 · अथैकसप्ततितमोऽध्यायः

निमित्तं परमीशस्य विश्‍वसर्गनिरोधयोः।

हिरण्यगर्भः शर्वश्‍च कालस्यारूपिणस्तव॥ ८

nimittaṃ paramīśasya viśvasarganirodhayoḥ|

hiraṇyagarbhaḥ śarvaśca kālasyārūpiṇastava|| 8

अर्थ

प्रभो! आप सर्वशक्तिमान्, रूपरहित कालस्वरूप हैं। विश्‍वकी सृष्टि और प्रलय आपकी ही शक्तिसे होता है। ब्रह्मा और शंकर तो उसमें निमित्तमात्र हैं। (इसी प्रकार जरासन्धका वध तो होगा आपकी शक्तिसे, भीमसेन केवल उसमें निमित्तमात्र बनेंगे)॥ ८॥

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