इसलिये भीमसेन ब्राह्मणके वेषमें जायँ और उससे युद्धकी भिक्षा माँगें। भगवन्! इसमें सन्देह नहीं कि यदि आपकी उपस्थितिमें भीमसेन और जरासन्धका द्वन्द्वयुद्ध हो, तो भीमसेन उसे मार डालेंगे॥ ७॥
ब्रह्मवेषधरो गत्वा तं भिक्षेत वृकोदरः।
हनिष्यति न सन्देहो द्वैरथे तव सन्निधौ॥ ७
इसलिये भीमसेन ब्राह्मणके वेषमें जायँ और उससे युद्धकी भिक्षा माँगें। भगवन्! इसमें सन्देह नहीं कि यदि आपकी उपस्थितिमें भीमसेन और जरासन्धका द्वन्द्वयुद्ध हो, तो भीमसेन उसे मार डालेंगे॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.71.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 574) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/71/7/