श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.71.31

दशम स्कन्ध · अध्याय 71 · अथैकसप्ततितमोऽध्यायः

एवं सुहृद्भिः पर्यस्तः पुण्यश्‍लोकशिखामणिः।

संस्तूयमानो भगवान् विवेशालंकृतं पुरम्॥ ३१

evaṃ suhṛdbhiḥ paryastaḥ puṇyaślokaśikhāmaṇiḥ|

saṃstūyamāno bhagavān viveśālaṃkṛtaṃ puram|| 31

अर्थ

इस प्रकार परमयशस्वी भगवान् श्रीकृष्णने अपने सुहृद्-स्वजनोंके साथ सब प्रकारसे सुसज्जित इन्द्रप्रस्थ नगरमें प्रवेश किया। उस समय लोग आपसमें भगवान् श्रीकृष्णकी प्रशंसा करते चल रहे थे॥ ३१॥

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