परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्णका दर्शन अत्यन्त दुर्लभ है। जब अजातशत्रु महाराज युधिष्ठिरको यह समाचार मिला कि भगवान् श्रीकृष्ण पधार गये हैं, तब उनका रोम-रोम आनन्दसे खिल उठा। वे अपने आचार्यों और स्वजन-सम्बन्धियोंके साथ भगवान्की अगवानी करनेके लिये नगरसे बाहर आये॥ २३॥
तमुपागतमाकर्ण्य प्रीतो दुर्दर्शनं नृणाम्।
अजातशत्रुर्निरगात् सोपाध्यायः सुहृद्वृतः॥ २३
परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्णका दर्शन अत्यन्त दुर्लभ है। जब अजातशत्रु महाराज युधिष्ठिरको यह समाचार मिला कि भगवान् श्रीकृष्ण पधार गये हैं, तब उनका रोम-रोम आनन्दसे खिल उठा। वे अपने आचार्यों और स्वजन-सम्बन्धियोंके साथ भगवान्की अगवानी करनेके लिये नगरसे बाहर आये॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.71.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 577) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/71/23/