भगवान् मुकुन्द मार्गमें दृषद्वती एवं सरस्वती नदी पार करके पांचाल और मत्स्य देशोंमें होते हुए इन्द्रप्रस्थ जा पहुँचे॥ २२॥
ततो दृषद्वतीं तीर्त्वा मुकुन्दोऽथ सरस्वतीम्।
पंचालानथ मत्स्यांश्च शक्रप्रस्थमथागमत्॥ २२
भगवान् मुकुन्द मार्गमें दृषद्वती एवं सरस्वती नदी पार करके पांचाल और मत्स्य देशोंमें होते हुए इन्द्रप्रस्थ जा पहुँचे॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.71.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 577) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/71/22/