श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.71.22

दशम स्कन्ध · अध्याय 71 · अथैकसप्ततितमोऽध्यायः

ततो दृषद्वतीं तीर्त्वा मुकुन्दोऽथ सरस्वतीम्।

पंचालानथ मत्स्यांश्‍च शक्रप्रस्थमथागमत्॥ २२

tato dṛṣadvatīṃ tīrtvā mukundo'tha sarasvatīm|

paṃcālānatha matsyāṃśca śakraprasthamathāgamat|| 22

अर्थ

भगवान् मुकुन्द मार्गमें दृषद्वती एवं सरस्वती नदी पार करके पांचाल और मत्स्य देशोंमें होते हुए इन्द्रप्रस्थ जा पहुँचे॥ २२॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें