श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.71.20

दशम स्कन्ध · अध्याय 71 · अथैकसप्ततितमोऽध्यायः

इत्युक्तः प्रस्थितो दूतो यथावदवदन्‍नृपान्।

तेऽपि सन्दर्शनं शौरेः प्रत्यैक्षन् यन्मुमुक्षवः॥ २०

ityuktaḥ prasthito dūto yathāvadavadannṛpān|

te'pi sandarśanaṃ śaureḥ pratyaikṣan yanmumukṣavaḥ|| 20

अर्थ

भगवान्‌की ऐसी आज्ञा पाकर वह दूत गिरिव्रज चला गया और नरपतियोंको भगवान् श्रीकृष्णका सन्देश ज्यों-का-त्यों सुना दिया। वे राजा भी कारागारसे छूटनेके लिये शीघ्र-से-शीघ्र भगवान्‌के शुभ दर्शनकी बाट जोहने लगे॥ २०॥✎ 2129

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2129 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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