श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.71.16

दशम स्कन्ध · अध्याय 71 · अथैकसप्ततितमोऽध्यायः

नरोष्ट्रगोमहिषखराश्‍वतर्यनः

करेणुभिः परिजनवारयोषितः।

स्वलंकृताः कटकुटिकम्बलाम्बरा-

द्युपस्करा ययुरधियुज्य सर्वतः॥ १६

naroṣṭragomahiṣakharāśvataryanaḥ

kareṇubhiḥ parijanavārayoṣitaḥ|

svalaṃkṛtāḥ kaṭakuṭikambalāmbarā-

dyupaskarā yayuradhiyujya sarvataḥ|| 16

अर्थ

इसी प्रकार अनुचरोंकी स्त्रियाँ और वारांगनाएँ भलीभाँति शृंगार करके खस आदिकी झोपड़ियों, भाँति-भाँतिके तंबुओं, कनातों, कम्बलों और ओढ़ने-बिछाने आदिकी सामग्रियोंको बैलों, भैंसों, गधों और खच्चरोंपर लादकर तथा स्वयं पालकी, ऊँट, छकड़ों और हथिनियोंपर सवार होकर चलीं॥ १६॥✎ 2129

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2129 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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