श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.70.24

दशम स्कन्ध · अध्याय 70 · अथ सप्ततितमोऽध्यायः

ये च दिग्विजये तस्य सन्‍नतिं न ययुर्नृपाः।

प्रसह्य रुद्धास्तेनासन्‍नयुते द्वे गिरिव्रजे॥ २४

ye ca digvijaye tasya sannatiṃ na yayurnṛpāḥ|

prasahya ruddhāstenāsannayute dve girivraje|| 24

अर्थ

उस मनुष्यने परमेश्‍वर भगवान् श्रीकृष्णको हाथ जोड़कर नमस्कार किया और उन राजाओंका, जिन्होंने जरासन्धके दिग्विजयके समय उसके सामने सिर नहीं झुकाया था और बलपूर्वक कैद कर लिये गये थे, जिनकी संख्या बीस हजार थी, जरासन्धके बंदी बननेका दुःख श्रीकृष्णके सामने निवेदन किया—॥ २३-२४॥✎ 1707

यह अर्थ श्लोक 23–24 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1707 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: निष्काम-भाव → निष्कामभाव

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