॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.70.20
मृदंगवीणामुरजवेणुतालदरस्वनैः ।
ननृतुर्जगुस्तुष्टुवुश्च सूतमागधवन्दिनः॥ २०
mṛdaṃgavīṇāmurajaveṇutāladarasvanaiḥ |
nanṛturjagustuṣṭuvuśca sūtamāgadhavandinaḥ|| 20
अर्थ
उस समय मृदंग, वीणा, पखावज, बाँसुरी, झाँझ और शंख बजने लगते और सूत, मागध तथा वंदीजन नाचते-गाते और भगवान्की स्तुति करते॥ २०॥