श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.69.26

दशम स्कन्ध · अध्याय 69 · अथैकोनसप्ततितमोऽध्यायः

अश्‍वैर्गजै रथैः क्वापि विचरन्तं गदाग्रजम्।✎ 1944

क्वचिच्छयानं पर्यंके स्तूयमानं च वन्दिभिः॥ २६

aśvairgajai rathaiḥ kvāpi vicarantaṃ gadāgrajam|

kvacicchayānaṃ paryaṃke stūyamānaṃ ca vandibhiḥ|| 26

अर्थ

कहीं घोड़े, हाथी अथवा रथपर सवार होकर श्रीकृष्ण विचरण कर रहे हैं। कहीं पलंगपर सो रहे हैं, तो कहीं वंदीजन उनकी स्तुति कर रहे हैं॥ २६॥✎ 1705

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1705 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: यज्ञ-कुण्डोंमें → यज्ञकुण्डोंमें
  • #1944 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): अश्‍वैर्गजै: → अश्‍वैर्गजै

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