kvacicchayānaṃ paryaṃke stūyamānaṃ ca vandibhiḥ|| 26
अर्थ
कहीं घोड़े, हाथी अथवा रथपर सवार होकर श्रीकृष्ण विचरण कर रहे हैं। कहीं पलंगपर सो रहे हैं, तो कहीं वंदीजन उनकी स्तुति कर रहे हैं॥ २६॥✎ 1705
अश्वैर्गजै रथैः क्वापि विचरन्तं गदाग्रजम्।
क्वचिच्छयानं पर्यंके स्तूयमानं च वन्दिभिः॥ २६
कहीं घोड़े, हाथी अथवा रथपर सवार होकर श्रीकृष्ण विचरण कर रहे हैं। कहीं पलंगपर सो रहे हैं, तो कहीं वंदीजन उनकी स्तुति कर रहे हैं॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.69.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 564) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/69/26/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)