श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.69.21

दशम स्कन्ध · अध्याय 69 · अथैकोनसप्ततितमोऽध्यायः

पृष्टश्‍चाविदुषेवासौ कदाऽऽयातो भवानिति।

क्रियते किं नु पूर्णानामपूर्णैरस्मदादिभिः॥ २१

pṛṣṭaścāviduṣevāsau kadā''yāto bhavāniti|

kriyate kiṃ nu pūrṇānāmapūrṇairasmadādibhiḥ|| 21

अर्थ

इसके बाद भगवान्‌ने नारदजीसे अनजानकी तरह पूछा—‘आप यहाँ कब पधारे! आप तो परिपूर्ण आत्माराम—आप्तकाम हैं और हमलोग हैं अपूर्ण। ऐसी अवस्थामें भला हम आपकी क्या सेवा कर सकते हैं॥ २१॥✎ 1705

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1705 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: यज्ञ-कुण्डोंमें → यज्ञकुण्डोंमें

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