इन यदुवंशियोंके साथ किसी प्रकार हमलोगोंने विवाह-सम्बन्ध कर लिया। ये हमारे साथ सोने-बैठने और एक पंक्तिमें खाने लगे। हमलोगोंने ही इन्हें राजसिंहासन देकर राजा बनाया और अपने बराबर बना लिया॥ २५॥✎ 1703
एते यौनेन सम्बद्धाः सहशय्यासनाशनाः।
वृष्णयस्तुल्यतां नीता अस्मद्दत्तनृपासनाः॥ २५
इन यदुवंशियोंके साथ किसी प्रकार हमलोगोंने विवाह-सम्बन्ध कर लिया। ये हमारे साथ सोने-बैठने और एक पंक्तिमें खाने लगे। हमलोगोंने ही इन्हें राजसिंहासन देकर राजा बनाया और अपने बराबर बना लिया॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.68.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 556) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/68/25/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)