taṃ saṃgamya yathānyāyaṃ gāmarghyaṃ ca nyavedayan|
teṣāṃ ye tatprabhāvajñāḥ praṇemuḥ śirasā balam|| 19
अर्थ
फिर अपनी-अपनी अवस्था और सम्बन्धके अनुसार सब लोग बलरामजीसे मिले तथा उनके सत्कारके लिये उन्हें गौ अर्पण की एवं अर्घ्य प्रदान किया। उनमें जो लोग भगवान् बलरामजीका प्रभाव जानते थे, उन्होंने सिर झुकाकर उन्हें प्रणाम किया॥ १९॥
तं संगम्य यथान्यायं गामर्घ्यं च न्यवेदयन्।
तेषां ये तत्प्रभावज्ञाः प्रणेमुः शिरसा बलम्॥ १९
फिर अपनी-अपनी अवस्था और सम्बन्धके अनुसार सब लोग बलरामजीसे मिले तथा उनके सत्कारके लिये उन्हें गौ अर्पण की एवं अर्घ्य प्रदान किया। उनमें जो लोग भगवान् बलरामजीका प्रभाव जानते थे, उन्होंने सिर झुकाकर उन्हें प्रणाम किया॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.68.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 556) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/68/19/