श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.67.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 67 · अथ सप्तषष्टितमोऽध्यायः

तत्रापश्यद् यदुपतिं रामं पुष्करमालिनम्।

सुदर्शनीयसर्वांगं ललनायूथमध्यगम्॥ ९

tatrāpaśyad yadupatiṃ rāmaṃ puṣkaramālinam|

sudarśanīyasarvāṃgaṃ lalanāyūthamadhyagam|| 9

अर्थ

वहाँ उसने देखा कि यदुवंशशिरोमणि बलरामजी सुन्दर-सुन्दर युवतियोंके झुंडमें विराजमान हैं। उनका एक-एक अंग अत्यन्त सुन्दर और दर्शनीय है और वक्षःस्थलपर कमलोंकी माला लटक रही है॥ ९॥

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